कहानी – लाल पान की बेगम

पूर्णिमा का चाँद सिर पर आ गया है। …बिरजू की माँ ने असली रुपा का मँगटिक्का पहना है आज, पहली बार। बिरजू के बप्पा को हो क्या गया है, गाड़ी जोतता क्यों नहीं, मुँह की ओर एकटक देख रहा है, मानो नाच की लाल पान की… पूरा पढ़ें...

कहानी – लाल पान की बेगम

चालाक महाजन और मेहनती चित्रकार – अकबर बीरबल की कहानी

एक बार एक महाजन को अपना चित्र बनवाने का शौक लगा। उसने एक चित्रकार को बुलवाकर अपना चित्र बनाने को कहा। पूरा पढ़ें...

चालाक महाजन और मेहनती चित्रकार – अकबर बीरबल की कहानी

माली और मटका चोर – अकबर बीरबल की कहानी

एक बार की बात हैं बीरबल अपने गाँव से गुजर रहे थे कि तभी उन्हें किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने जब चारों और देखा तो उन्हें एक बूढा आदमी दिखा। बीरबल ने उसके पास जाकर देखा तो पता चला कि ये तो राजा अकबर के बगीचे में काम करने वाला माली हैं। पूरा पढ़ें...

माली और मटका चोर – अकबर बीरबल की कहानी

पेड़ की गवाही – अकबर बीरबल की कहानी

रोशन जीवन के अंतिम पड़ाव में था इसलिए वह तीर्थयात्रा पर जाना चाहता था । उसने अपने जीवन भर की कमाई एक जगह एकत्रित कर रखी थी पूरा पढ़ें...

पेड़ की गवाही – अकबर बीरबल की कहानी

बाढ़ और राहत बचाव कार्य – तेनालीराम की कहानी

एक बार विजयनगर में बाढ़ के कारण गावं के गावं पानी में डूब गए जिसकी वजह से गावं के लोगो का काफी नुकसान हो गया। जब महाराज कृष्णदेव राय को इस प्राकृतिक आपदा के बारें में बताया गया तो उन्होंने फ़ौरन एक मंत्री को राज्यभर में राहत कार्य शुरू करने को कहा। पूरा पढ़ें...

बाढ़ और राहत बचाव कार्य – तेनालीराम की कहानी

तेनालीराम के बाग की सिंचाई – तेनालीराम की कहानी

एक बार विजयनगर में भीषण गर्मी के कारण सूखे की स्थिति पैदा हो गई। राज्य की नदियों -तालाबों का जलस्तर घट जाने के कारण पानी की विकट समस्या खड़ी हो गई। सूखे के कारण नगर के सभी बाग़ – बगीचे भी सूखने लगे। पूरा पढ़ें...

तेनालीराम के बाग की सिंचाई – तेनालीराम की कहानी

मटके में मुंह – तेनालीराम की कहानी

एक बार महाराज कृष्णदेव राय किसी बात पर तेनालीराम से नाराज हो गए। गुस्से में आकर उन्होंने तेनालीराम से भरी राजसभा में कह दिया कि कल से मुझे दरबार में अपना में अपना मुंह मत दिखाना। उसी समय तेनालीराम दरबार से चला गया। पूरा पढ़ें...

मटके में मुंह – तेनालीराम की कहानी

उधार का बोझ – तेनालीराम की कहानी

एक बार किसी वित्तीय समस्या में फंसकर तेनालीराम ने राजा कृष्णदेव राय से कुछ रुपए उधार लिए थे। समय बीतता गया और पैसे वापस करने का समय भी निकट आ गया, परंतु तेनाली के पास पैसे वापस लौटाने का कोई प्रबंध नहीं हो पाया था, पूरा पढ़ें...

उधार का बोझ – तेनालीराम की कहानी

तेनालीराम और चोटी का किस्सा – तेनालीराम की कहानी

एक दिन बातों-बातों में राजा कृष्णदेव राय ने तेनालीराम से पूछा, ‘अच्छा, यह बताओ कि किस प्रकार के लोग सबसे अधिक मूर्ख होते हैं और किस प्रकार के सबसे अधिक सयाने?’ पूरा पढ़ें...

तेनालीराम और चोटी का किस्सा – तेनालीराम की कहानी

रसगुल्ले की जड़ – तेनालीराम की कहानी

मध्य पूर्वी देश से एक ईरानी शेख व्यापारी महाराज कृष्णदेव राय का अतिथि बन कर आता है। महाराज अपने अतिथि का सत्कार बड़े भव्य तरीके से करते हैं और उसके अच्छे खाने और रहने का प्रबंध करते हैं, और साथ ही कई अन्य सुविधाएं भी प्रदान करते हैं। पूरा पढ़ें...

रसगुल्ले की जड़ – तेनालीराम की कहानी